घनाक्षरी · Reading time: 1 minute

राम जी के नाम दीप आप भी जलाइए।

काल के कपाल पर, भारती के भाल पर,
खिल रहा है कमल,खुशियां मनाइए।
राम लला हैं मगन, सुवासित है चमन,
प्रीति-पुष्प-गंध संग,भक्ति गीत गाइए।
हर्षित हुए स्वजन, ले रहा हिलोर मन,
सरयू की धार बीच,आप भी नहाइए।
द्वार जगमगा रहे,दृश्य झिलमिला रहे;
राम जी के नाम दीप आप भी जलाइए।

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