कविता · Reading time: 1 minute

राम की शर्तें अपने भक्तों से

राम के नाम की फ़ोटो लगा ली सबने,
क्योकि फ़ोटो बिना शर्त आयी थी।
चलो मानले की भेजने वाले ने इसमें,
लगाने की एक शर्त भी लिखबाई थी।
शर्त यह थी मर्यादापुरुषोत्तम की फ़ोटो,
वही लगाय जिसने मर्यादा न छोड़ी हो।
देखकर दूसरों की बहिन बेटियां कभी,
जिंदगी मै अपनी तिरछी नज़र ना मोड़ी हो।
जिसने सुबह उठते ही छुये हो माँ के पैर,
जिसने बाप के सामने चुप्पी ना तोड़ी हो।
जिसने अन्याय के सामने न झुकाया हो माथा,
जिसने शरणागत से मित्रता अपनी जोड़ी हो।
ह्रुदय पे हाथ रख कहे अबसे मानेगें सारी शर्ते,
अगर तुम मैं और मुझमें बची शर्म थोडी हो।
जितेंन्द्र दीक्षित,
पड़ाव मंदिर साईंखेड़ा।

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