कविता · Reading time: 1 minute

जैसा करोगे वैसा भरोगे

जब कोई दीया जलाता है
चारों ओर रोशनी फैलाता है
उसी दिये से कोई घर जलाता है
और जीवन में अंधेरा फैलाता है।।

है सबके पास आग वही फर्क है
कि कोई कैसे उपयोग करता है
है पास हम सबके भी अथाह ऊर्जा
फर्क है, कोई कैसे उपयोग करता है।।

कोई अपने बाहुबल से
अपने देश की रक्षा करता है
कोई उसी बाहुबल से
चारों ओर भय फैलाया करता है।।

हो सत्ता गर पास तुम्हारे
कोई बस अपनो का भला करता है
कोई उपयोग कर सत्ता का
देश के जन जन का भला करता है।।

कोई पैसों के बल पर
विलासिता और अय्याशी ही करता है
कोई पैसे के उपयोग से
कई ज़रूरतमंदों की सेवा भी करता है।।

कोई जन कल्याण को ही
अपने जीवन का उद्देश्य बनाते है
लेकिन कोई अपने सामर्थ्य से
जनता में अपनी दहशत फैलाते है।।

है तुम्हारे पास क्या क्या
फर्क नहीं कोई पड़ता है
उससे जो तुम करते हो
वो ही प्रभावित करता है।।

जो निर्माण में लगाए ऊर्जा
वो ही राम कहलाता है
ऊर्जा विनाश में लगाने वाला
तो रावण कहलाता है।।

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