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राधिका प्रेम

सोनू हंस

सोनू हंस

कविता

April 4, 2017

*विधा*- राधिका छंद
(प्रति चरण 22 मात्रा, यति 13, 9)

मेरे प्रेम की न श्याम नहीं मिले थाह।
तकूँ तकूँ दिनि-रैन मैं तेरी यूँ राह॥
अँसुवन रुकै न दिनि-रैनि पथराए नैन।
हिय आय मोरा भर-भर नहिं आवे चैन॥

तेरी प्रीति जो हिय में यूँ नहीं निकसे।
जब तक घट में प्राण हैँ ये अरू बिकसे॥
श्याम सकल जीवन वारि नाम पे तेरे।
प्रेम की बरखा बरसे बस संग तेरे॥

कान्हा प्रीत नहिं बिसरै ब्रज सूखा लगे।
तड़पूँ चलि आऊँ दौरि श्याम-प्यास जगे॥
जिस ओर मिलहिं रथ-धूरि उसी पथ जावे।
कालिंदी तक जा राधे साँझ तक आवे॥

चले जाओ कान्हा तुम मैं न रोकूँगी।
करना तुम कुछ भी श्याम मैं न टोकूँगी॥
पर हो सके तो मुझको नाहिं बिसराना।
मिले जब एकांत कभी राधिका पाना॥
*सोनू हंस*✍✍

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