राधा कृष्ण की होली

गीत●●खेल रहे सब होली
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आगे आगे राधा मोहन,
पीछे सबकी टोली… !
इंद्रधनुष के, प्रीत रंगों से,
खेल रहे सब होली…!
होली-होली- होली- 2

राधा रानी हाथ न आये,
कान्हा उसको पास बुलाये ….!
मुरली की जब तान सुनाई,
राधा सुनके रुक ना पाई….!
जैसे स्वर में बन्सी बाजी,
उसी रंग में राधा नाची….!
लाज शरम सब छोड़के,
प्रीत की चूनर ओढ़ के …!
थाम हाथ कान्हा से बोली,
मैं तो तेरी होली…!
बरस रहा है झर झर अमृत…!
खेल रहे सब होली.. !
होली-होली- होली- 2

आगे आगे राधा मोहन …
पीछे सबकी टोली… !
इंद्रधनुष के, प्रीत रंगों से..
खेल रहे सब होली…! होली-होली- होली- 2

छुपे कहाँ बैठे हो सजना,
बीत न जाये अनुपम सपना…!
मैं भी थोड़ा रंग लगा लूँ ,
अंग से अपना अंग लगा लूँ…!
खेलूँ सजना ऐसी होली,
राधा जैसे करे ठिठोली…!
अब तो आओ प्रीतम प्यारे,
चाहे देखें लोग नज़ारे…!
तन्हाई से मैं घबराऊँ,
बिन तेरे अब रह ना पाऊँ….!
अब तू सहरा बाँध के आना,
डोली मेरी सँग ले जाना..!
तू ही बस मेरा हम जोली,
खेल रहे सब होली…!
होली-होली- होली- 2

आगे आगे राधा मोहन …
पीछे सबकी टोली… !
इंद्रधनुष के, प्रीत रंगों से..
खेल रहे सब होली…!
होली-होली- होली- 2

✍✍ डॉ० प्रतिभा माही

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