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राधास्तुति

*श्री राधास्तुति*
श्री राधिके वृषभानुजा घनश्याम चित्त विहारिनी।
सुख धाम बरसाने विराजत कीर्ति मंगल दायिनी।
गोलोक स्वामिनि नित्य लीलारत रसेश्वर संगिनी।
वर भक्ति श्रीपद दायिका कलिकाल कल्मष भंजनी।
रजनीश कर माधुर्य अपकृत शोभनं कंजाननं।
झाँझर चरण झंकृत सरस मनु हंसदल गुंजायनं।
नथ नासिका कुण्डल श्रुती मनु दामिनी द्युति हारिनी।
चूणामणी वेणी मुकुटमणि दीप्ति हरि सुख कारिनी।
नीलाम्बरा नीरज नयन दृगकोर भृकुटि विलासिनी।
करपाश कंठस्त्रज हरी उन्मत्त मंद प्रहासिनी।
सखि अष्ट सह अधिनायिका नित रास मण्डप वासिनी।
श्री कृष्ण सँग नटवर प्रिया मम उर वसौ अघ नाशिनी।
गौरांगि मुनि तव ध्यान धृत दृग अश्रु पुलकावलि युतं।
वृजराज प्रीति प्रदायिका हरि विश्व तव इतरं कुतं।
तन कुमुद कर पंकज चरण लाक्षा अरुण शुभ रंजितं।
सामीप्य देहि विहारि इषुप्रिय राधिके पद सेवनं।।
अंकित शर्मा ‘इषुप्रिय’
रामपुरकलाँ, सबलगढ़(म.प्र.)

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