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रात का विरह गीत

Dr.rajni Agrawal

Dr.rajni Agrawal

गीत

September 10, 2017

रात का विरह गीत
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प्रेम पाश में मुझे बाँध कर
प्रीत साथ में छल क्यों लाई ?

रात के तन्हा आलम में
रजत चाँदनी चमक रही है।
पूनम चाँद भाल सजा कर
मेरे आँगन बरस रही है।

शीतलता से अगन लगाने-
मुझे जलाने भू पर आई।
प्रीत साथ में छल क्यों लाई?

यौवन से मदमाती रजनी
गीत विरह के हँस कर गाती।
शूल चुभा कर तानों से वह
पुलकित हो मन में मुसकाती।

दर्द लिए सीने में अपने-
मैंने पल-पल रात बिताई।
प्रीत साथ में छल क्यों लाई?

राहत के बदले आँसू दे
तुमने मन पर वार किया है।
बैठ गोद में रोज़ तिमिर की
मैंने तुमको प्यार दिया है।

जान न पाया रीत प्रीत की-
उर में कितनी पीर समाई।
प्रीत साथ में छल क्यों लाई?

पलकों के घूँघट में ढक कर
बदनामी से तुम्हें बचाया।
कितने सागर खार किए तब
मैंने तुमको नयन बसाया।

किससे कहता मन की पीड़ा-
सोच आँख मेरी भर आई।
प्रीत साथ में छल क्यों लाई?

डॉ. रजनी अग्रवाल” वाग्देवी रत्ना”
संपादिका-साहित्य धरोहर
महमूरगंज, वाराणसी। (मो.-9839664017)

Author
Dr.rajni Agrawal
 अध्यापन कार्यरत, आकाशवाणी व दूरदर्शन की अप्रूव्ड स्क्रिप्ट राइटर , निर्देशिका, अभिनेत्री,कवयित्री, संपादिका समाज -सेविका। उपलब्धियाँ- राज्य स्तर पर ओम शिव पुरी द्वारा सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार, काव्य- मंच पर "ज्ञान भास्कार" सम्मान, "काव्य -रत्न" सम्मान", "काव्य मार्तंड" सम्मान, "पंच रत्न"... Read more
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