गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

राज दिल में हमें ये छुपाना पड़ा

राज दिल में हमें ये छुपाना पड़ा
याद को आशियाना बनाना पड़ा

ठोकरें खूब मिलती रहीं राह में
बोझ उनका हमें खुद उठाना पड़ा

अश्क पी -पी के हम जी रहे हैं यहाँ
उनकी खातिर हमें मुस्कुराना पड़ा

जब नज़र से उन्होंने निवेदन किया
गीत फिर प्यार का इक सुनाना पड़ा

रोज सपनों में आने का वादा किया
रात क्या दिन में खुद को सुलाना पड़ा

अर्चना इस जुदाई को सहना कठिन
उनको झूठी खबर से बुलाना पड़ा

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