राजनीति के हाल!

क्या कहें कि क्या हाल है राजनीति के,
हर सवाल में बवाल है राजनीति के,
गरीब मजदूरों के हाल चाल कौन पूछे?
आम पपीते ही मुख्य सवाल है राजनीति के,
बेकार में हल्ला मचाते हैं लोग बेटी पढ़ाओ के नाम पर,
वो जवाब भी चाहते हैं सरकार के पांच साल के काम पर,
उन्हें तो खुद को देशद्रोही ही मान लेना चाहिए जी,
जो उंगली उठाते हैं नोटबंदी जीएसटी के परिणाम पर,
नीरव और माल्या तो मुख्य स्तंभ हैं राजनीति के,
क्या कहें कि क्या हाल है राजनीति के।
राफेल घोटाला तो इसकी शान बढ़ाते हैं,
प्रज्ञा ठाकुर जैसे लोग तो इसकी मान बढ़ाते हैं,
पुलवामा और बालाकोट तो वोट मांगने का सामान हैं जी,
मुस्लिम अत्याचार से तो ये राष्ट्रप्रेम दिखाते हैं,
अखलाक नजीब तो प्रकाष्ठा हैं राष्ट्र भक्ति के,
क्या कहें कि क्या हाल है राजनीति के।
ना जी ना! राजनीति में किसानों के सवाल कैसे पूछ सकते हो,
साहेब के बटुआ रखने का खुलासा कैसे रोक सकते हो,
1988 में रंगीन फोटो खींचने की बात एकदम सच है जी,
बादलों से रडार के काम न करने को तुम झूठ कैसे कह सकते हो,
मीडिया दलाली न करे सता के नुमाइंदों के,
ये कोई बात हुई राजनीति के,
क्या कहें कि क्या हाल है राजनीति के…..!!!!!

….राणा….

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