राजनीति की चालें

राजनीति की चालें
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देखी मैंने आज भी,राजनीति की चाल।
समीकरण सब देखके,टिकटें मिलें कमाल।।
टिकटें मिलें कमाल,जाति धर्म क्षेत्र हावी।
यूँ ना मिटता भेद,बने और भी प्रभावी।
नेता चुनिए खास,जाति की कैसी शेखी।
बगुल हंस सम रंग,अलग नीयत पर देखी।

पार्टी का रुख देखिए,नेता की पहचान।
परीक्षा कड़ी मानिए,जीतो पर मैदान।।
जीतो पर मैदान,हृदय रखिए सच्चाई।
त्यागो तुम निज स्वार्थ,इसमें सबकी भलाई।
पाँच साल की वाट,लगी तो खेला दर्टी।
पर होगा इक जोश,सही चुनली जो पार्टी।

होते हैं बहरूपिये,वादें जाएँ भूल।
मौका देकर आज तुम,देना ना जी तूल।।
देना ना जी तूल,अगर बहलाने आएँ।
अबके गलती माँग,फिर से गर बरगलाएँ।
सुन प्रीतम की बात,नहीं झूठे सच बोते।
गलती करके एक,समझें इंसान होते।

आर.एस.बी.प्रीतम
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