23.7k Members 49.9k Posts

राखी

🕉

* * * राखी * * *

आननपोथी रची निजपीठिका
सुन्दर सहज सुबोध
सुदर्शन-मनमोहन जी स्वीकार करो
तुम्हें भेजा है मित्र-अनुरोध

तुम्हें भेजा है मित्र-अनुरोध . . . . .

बड़के भैया मेरे स्नेह का सागर
नटखट छोटा नंदकुमार
दोनों मिल राखी का दीन्हा
छुअनपटभाषी यह उपहार

सोंधी तड़ित राखी में कौंधे
भाई-बहन प्रेम-प्रबोध

तुम्हें भेजा है मित्र-अनुरोध . . . . .

सब दिन वचनभंग के अपराधी
अब नगर रहो या गाम
संपर्क रहेगा तुमसे ए जी
निसिदिन आठों याम

अणुडाक है प्रेम की पाती
कूटाक्षर भटकनिरोध

तुम्हें भेजा है मित्र-अनुरोध . . . . .

देयपत्रक-से मनमोहक हो तुम
आधार जैसे अनमोल
वृहद्हाट मेरा स्वर गूँजे
नहीं निकलें तुम्हारे बोल

संपादी नहीं खर्च हमारे
हटा लो सब अवरोध

तुम्हें भेजा है मित्र-अनुरोध . . . . .

लतपत-रे-गणक कांधे डालूं
हाथों में तुम्हारा हाथ
अधुनातन रथ उड़ता जाए
प्राणपवन रविरश्मि भात

पथकर-कुटिया गति पड़ती धीमी
मन में चढ़ता क्रोध

तुम्हें भेजा है मित्र-अनुरोध . . . . .

भावज मेरी मैया जैसी
सब दोषों का उपचार
रीति-नीति सब वो जाने
नूतन तलवीक्ष्ण अवतार

मेरी बात लछमन-रेखा माने
नहीं करती कभी विरोध

तुम्हें भेजा है मित्र-अनुरोध . . . . . !

वेदप्रकाश लाम्बा ९४६६०-१७३१२

Like Comment 0
Views 3

You must be logged in to post comments.

LoginCreate Account

Loading comments
वेदप्रकाश लाम्बा लाम्बा जी
वेदप्रकाश लाम्बा लाम्बा जी
19 Posts · 107 Views