-: राखी शहीद हो गई :-

बहना तेरी राखी शहीद हो गई
सरहद के पार खाके गोलियां हजार
ना जाने कहां सो गई
बहना तेरी राखी शहीद हो गई
था वादा में लौट के आऊंगा
तेरी डोली को हाथ से सजाऊंगा
तेरी डोली कि आस खो गई
बहना तेरी राखी शहीद हो गई
तेरी राखी के मनके विखरे
मन के बिखरे मन के टुकड़े
डोर तार-तार हो गई
बहना तेरी राखी शहीद हो गई
धवल हिमालय लाल लहू से
सिहर गया सिहर गया
मां झेलम का पानी देखके
ठहर गया ठहर गया
तेरी राखी ने प्रचंड वन
फिर दुर्गा का अवतार लिया
रक्त बीज जैसे संहारे
रिपुदल का सर कलम किया
चंड मुंड को काट काट
धारण मुंडो की माला की
शुम्भ निशुम्भ को मार कालीके
मस्तक की जयमाला की
लहू की वैतरणी बनकर फिर
गंगा जैसे शांत हो गई
बहना तेरी राखी शहीद हो गई
बहना तेरी राखी शहीद हो गई

– पर्वत सिंह राजपूत (अधिराज)

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