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राखी के दोहे……..

Ramesh chandra Sharma

Ramesh chandra Sharma

दोहे

August 1, 2016

रक्षाबंधन ……

भेज रही भैया तुम्हें, राखी के दो तार,
बन्द लिफ़ाफ़े में किया,दुनिया भर का प्यार ।

भेजी पाती नेह की, शब्द पुष्प के हार,
छोटी बहना कह रही ,कर लेना स्वीकार ।

रूठे भैया की करूं, मैं सौ सौ मनुहार
शायद रूठे इस लिये, आ न सकी इस बार ।

सावन बरसे आंख से, ब्याही कितनी दूर,
बाबुल भी मजबूर थे मैं भी हूं मजबूर ।

भैया खत भेजा नहीं, ना कोई संदेस,
लो सावन भी आ गया, बहन बसी परदेस ।

भाई, बाबुल रो रहे, बहना भी बेज़ार,
मम्मी की रुकती नहीं आंखों से जलधार ।

-आर० सी० शर्मा “आरसी”

Author
Ramesh chandra Sharma
गीतकार गज़लकार अन्य विधा दोहे मुक्तक, चतुष्पदी ब्रजभाषा गज़ल आदि। कृतिकार 1.अहल्याकरण काव्य संग्रह 2.पानी को तो पानी लिख ग़ज़ल संग्रह आकाशवाणी कोटा से काव्य पाठ कई साहित्य सम्मान एवं पुरुस्कारों से सम्मानित
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