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– – रह गया – –

Ranjana Mathur

Ranjana Mathur

गीत

September 13, 2017

मेरी खातिर आप ने जो कुछ किया,
उस का तो कर्ज ही चुकाना रह गया।
आप ने तो संवारी मेरी जिंदगी,
मुझसे ये फर्ज भी निभाना रह गया।
आप ने कांटे चुने व हमको फूल दिये,
आप के प्यार के आगे कद हमारा बौना रह गया।
आप ही ने दी हमें ये सुंदर दुनिया,
मन हमारा खूबसूरती में इसकी सिमट कर रह गया ।
देने वाले का तो हमने कुछ किया नशुक्रिया,
अपनी दुनिया में ही फिर तो
मन उलझ कर रह गया ।
आप ने बनाया था हमें अपनी जिंदगी,
मेरा मन आप को परे झटक कर रह गया ।
आप के जीवन में छाये हुए थे हम,
वक्त आया तो खुदगर्जी में मेरा जमीर,
आप के स्नेह को भुला कर रह गया ।
आज जब आप मौजूद न हैं इस जहान में,
तो सौ मलालों के साथ माफ़ी मांगने,
की हसरत में हाथ मलता रह गया ।

—रंजना माथुर दिनांक 27/07/2017
(मेरी स्व रचित व मौलिक रचना )
©

Author
Ranjana Mathur
भारत संचार निगम लिमिटेड से रिटायर्ड ओ एस। वर्तमान में अजमेर में निवास। प्रारंभ से ही सर्व प्रिय शौक - लेखन कार्य। पूर्व में "नई दुनिया" एवं "राजस्थान पत्रिका "समाचार-पत्रों व " सरिता" में रचनाएँ प्रकाशित। जयपुर के पाक्षिक पत्र... Read more
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