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रहे मदहोश हम मद में ,न जब तक हार को देखा

Dr Archana Gupta

Dr Archana Gupta

गज़ल/गीतिका

December 6, 2016

रहे मदहोश हम मद में ,न जब तक हार को देखा
हमें तब होश आया जब समय की मार को देखा

गरीबी से कहीं दम तोड़ते बीमार को देखा
उधर मंदिर में पैसों के लगे अम्बार को देखा

बुराई और अच्छाई सदा ही साथ चलती हैं
जहाँ पर फूल को देखा वहीँ पर खार को देखा

हमारे प्यार की नौका फँसी मझधार में जब भी
कभी फिर धार को देखा कभी पतवार को देखा

मिली छोटे नगर जैसी न गर्माहट वो रिश्तों में
महानगरों के हमने जिस किसी परिवार को देखा

यहाँ हम लक्ष्य पाने को,चले चलते रहे हर पल
कभी इंकार को देखा नहीं इकरार को देखा

वही तो जानते हैं मोल जीवन में बहारों के
जिन्होंने आँख से अपनी यहाँ पतझार को देखा

नहीं है भावना अब ‘अर्चना’ राधा किशन जैसी
यहाँ तो हर तरफ बस प्यार के व्यापार को देखा
डॉ अर्चना गुप्ता

Author
Dr Archana Gupta
Co-Founder and President, Sahityapedia.com जन्मतिथि- 15 जून शिक्षा- एम एस सी (भौतिक शास्त्र), एम एड (गोल्ड मेडलिस्ट), पी एचडी संप्रति- प्रकाशित कृतियाँ- साझा संकलन गीतिकालोक, अधूरा मुक्तक(काव्य संकलन), विहग प्रीति के (साझा मुक्तक संग्रह), काव्योदय (ग़ज़ल संग्रह)प्रथम एवं द्वितीय प्रमुख... Read more
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