Jun 10, 2021 · कुण्डलिया
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रही ना अब खुद्दारी

धरती के भगवान जो, कहलाते हैं आज।
केवल पैसा चाहते, भूले अपना काज।।
भूलें अपना काज, बने अब तो व्यापारी।
बेच दिए ईमान,रही ना अब खुद्दारी।।
करते ऐसा काम,जेब है जिससे भरती।
मरे भले संसार,भले हो बंजर धरती।।
✍️जटाशंकर”जटा”

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Jatashankar Prajapati
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ग्राम-सोन्दिया बुजुर्ग पोस्ट-किशुनदेवपुर जनपद-कुशीनगर उत्तर प्रदेश मो०नं० 9792466223 --शिक्षक ---पत्रकार ---कवि View full profile
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