*रहमत*

सहरा भी गुलज़ार हैं होते
दरिया ग़म के पार हैं होते
खुदा की होती जब है रहमत
उन्नति के आसार हैं होते

*धर्मेन्द्र अरोड़ा*

10 Views
*काव्य-माँ शारदेय का वरदान * Awards: विभिन्न मंचों द्वारा सम्मानित
You may also like: