मुक्तक · Reading time: 1 minute

*रहमत*

कदम तेरी चौखट पर जब सेरखा है
आसमां से भी ऊंचा मेरा सर
लगता है
तेज आँधियाँ है, फिर भी मैं रोशनहूँ
ये सिर्फ तेरी रहमतों का असर
लगता है
*धर्मेन्द्र अरोड़ा*

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