गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

रहनुमाई

रहनुमाई जिन्हें सोपी,सैयाद वही निकले
सकते में है बुलबुल ,जनतंत्र के बागों में
किस पर यकी कीजिए ,किस पर वफा कीजिए
हर दर पर धोखे हैं, सियासी दुकानों में
वे सेवा को भी आते हैं ,फिर लूट मचाते हैं
दीवारें हुई जर्जर ,सरकारी खजानों में
तहरीर से साधु हैं, शैतान है कामों में
तुम तान के मत सोना, खतरा है मकानों में
वो आज लुटा बैठा, कल तेरी बारी है
शैतान भी बैठे हैं ,साधु के लिबासों में
पहचान हुई मुश्किल , राहे सियासत में
जरा गौर से पहचानो सत्ता के दलालों में

सुरेश कुमार चतुर्वेदी

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