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रहते हो तुम क्यों खुद से ही इतने खफ़ा खफ़ा

Dr Archana Gupta

Dr Archana Gupta

गज़ल/गीतिका

February 12, 2018

रहते हो तुम क्यों खुद से ही इतने खफ़ा खफ़ा
हँस लो हँसा लो गम खुशी दोनों मिला मिला

वैसे तो हौसलों की कमी है नहीं मगर
रुख देख कर ज़माने का दिल है डरा डरा

कोई दवा पुरानी नहीं काम आ सकी
हर बार क्योंकि ज़ख्म ही पाया नया नया

अरमान तो है शान से बेटी विदा करूँ
लेकिन विदाई सोच ही दिल है भरा भरा

जब जब भी ज़िन्दगी ने जुदा अपनों से किया
महसूस हमने तब किया खुद को लुटा लुटा

क्यों बोझ लगने लगती है औलाद को वो माँ
पाला है जिसने अपनी मुहब्बत लुटा लुटा

हारे नहीं अँधेरों से भी ‘अर्चना’ कभी
ले जुगनुओं को साथ बढ़े हम जरा जरा

11-02-2018
डॉ अर्चना गुप्ता

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Author
Dr Archana Gupta
From: मुरादाबाद
Co-Founder and President, Sahityapedia.com जन्मतिथि- 15 जून शिक्षा- एम एस सी (भौतिक शास्त्र), एम एड (गोल्ड मेडलिस्ट), पी एचडी संप्रति- प्रकाशित कृतियाँ- साझा संकलन गीतिकालोक, अधूरा मुक्तक(काव्य संकलन), विहग प्रीति के (साझा मुक्तक संग्रह), काव्योदय (ग़ज़ल संग्रह)प्रथम एवं द्वितीय प्रमुख... Read more
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