कुण्डलिया · Reading time: 1 minute

रसना

रसना रसमय हो सरस,हो उत्तम व्यवहार ।
वह सायक संधर्ष बिन, जीत लिया संसार।।
जीत लिया संसार,अमृत के जैसी वाणी।
हर मुश्किल आसान,आत्म संयम से प्राणी।
परहित के अनुरूप, कर्ण प्रिय स्वर ही कहना।
मधुर शहद सा बोल,हृदय में घोले रसना
-लक्ष्मी सिंह
नई दिल्ली

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