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“रब बदल गया”

MONIKA MASOOM

MONIKA MASOOM

कविता

March 26, 2017

जब चाहा जी तब बदल गया
थोङा सा नहीं सब बदल गया

ढब बदला तूने जीवन का
अब कहता है रब बदल गया

खुदगर्ज हुआ आदम तेरे
जीने का मतलब बदल गया

है याद तुझे या भूल चुका
तू कितनी मरतब बदल गया

“मासूं” मेरे हाथों से कब
तेरे हाथों सब बदल गया

कुदरत कैसे न बदले अब
जब तेरा करतब बदल गया

मोनिका “मासूम”
मुरादाबाद

Author
MONIKA MASOOM
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