Apr 15, 2018 · दोहे
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रब कहाँ?

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मात – पिता मासूम में, रब बसते हैं रोज।
नादाँ मानव रब भला, कहाँ रहा है खोज।। १

रब तलाश खुद में करो, फिर दूजे में ढूंढ।
मिल जायेगा रब तुझे, नहीं रहेगा मूढ़।। २

मन में है विश्वास तो, पत्थर में भगवान।
वरना दुनिया में सभी, लगते हैं शैतान।। ३

इंसा बस इंसान है, समझ नहीं भगवान।
कलयुग में मत खोजिए, रब जैसा इंसान ।। ४

इंसानों में रब बसे, ये है सच्ची बात।
पर कलयुग ने दे दिया, अब इसको भी मात।। ६

करना है तो कीजिए, खुद में खुदा तलाश।
मिल जायेगा खुद खुदा, रख खुद पर विश्वास।। ७
🌹 🌹 🌹 🌹 -लक्ष्मी सिंह 💓 ☺

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लक्ष्मी सिंह
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MA B Ed (sanskrit) My published book is 'ehsason ka samundar' from 24by7 and is... View full profile
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