कविता · Reading time: 1 minute

रहबर ए कौम

मेरे सच को भी कसौटियों पे यार परखा जाएगा
उनके झूठ को भी इनायत कह कर नवाजा जाएगा

हम मूत मइन होकर ही बैठे हैं रहबर ए मुल्क से
सच उनके ही हाथो सौ परतों में दफनाया जाएगा
~ सिद्धार्थ

भूखे मानुष के चीत्कार को भी कहे हैं लोग ढोंग
तोंद वाले के डकार को भी कहे, बड़ा है इनका रोग …😎
~ सिद्धार्थ

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