Skip to content

रदीफ़-रह गया

Neelam Sharma

Neelam Sharma

गज़ल/गीतिका

July 27, 2017

रदीफ़- रह गया।

जाने कहां गए वो लम्हे इक जर्जर किला था ढह गया।
मैं बिन जल मछली सी तड़पूं हर पल अकेला रह गया।

ग़म-ए- जुदाई है या पहाड़ है,झरना अश्कों का बह गया।
दिल फिर अकेला रह गया,हाय! क्यों अकेला रह गया।

देकर साइयाँ, परछाइयाँ जलते मरु सी खाइयाँ
जलती विरह अँगनाइयों का,मातम ही बस रह गया।

बस देह पिंजरे में अकेला मेरे उर का पंछी दह गया।
कबसे सनम तेरे इंतज़ार में दिल जिगर अकेला रह गया।

तेरे चाहतों के बाग़ में, दिल जाने क्या क्या सह गया।
नाजुक से मनवा में,बस बोल आह-कराह का रह गया।

कर्मठ कभी था जो नीलम,वो थका-हारा रह गया।
क्या क्या कहूँ तुमसे सनम बाकी बहुत कुछ रह गया।

दिल बेताब था सुनने को आते-आते मेरा नाम
उसके कांपतेे लरजते होंठों पे आकर रह गया।

अब आए,वो तब आए मन राह देखता रह गया।
झूठा दिलासा देते रहे वो,मन सच बोलता रह गया

आँधियां तो बहुत आईं थीं जीवन में मेरे नीलम
थे कृष्ण मेरे साथ तो आशा दीप जलता रह गया।

नीलम शर्मा

Share this:
Author
Neelam Sharma

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

आज ही अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें और आपकी पुस्तक उपलब्ध होगी पूरे विश्व में Amazon, Flipkart जैसी सभी बड़ी वेबसाइट्स पर

साथ ही आपकी पुस्तक ई-बुक फॉर्मेट में Amazon Kindle एवं Google Play Store पर भी उपलब्ध होगी

साहित्यपीडिया की वेबसाइट पर आपकी पुस्तक का प्रमोशन और साथ ही 70% रॉयल्टी भी

सीमित समय के लिए ब्रोंज एवं सिल्वर पब्लिशिंग प्लान्स पर 20% डिस्काउंट (यह ऑफर सिर्फ 31 जनवरी, 2018 तक)

अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें- Click Here

या हमें इस नंबर पर कॉल या WhatsApp करें- 9618066119

Recommended for you