.
Skip to content

रगं तआस्सुब के जो देगी राजधानी हर तरफ़

Salib Chandiyanvi

Salib Chandiyanvi

गज़ल/गीतिका

August 27, 2016

खूब है मशहूर ये झूठी कहानी हर तरफ़
चाँद पर देखी गई है एक नानी हर तरफ
…….
सारी दुनिया जानती है क़ीमतें इनकी मगर
क्यों बहाते फिर रहे हैं खून पानी हर तरफ़
…….
आप क़ायम कर नहीं सकते अगर चैनो अम्न
कैसे कर सकते हैं क़ायम हुक्मरानी हर तरफ़
…….
उम्र भर मैं प्यार के दो बोल को तरसा मगर
थी बहुत बिखरी हुई शींरी ज़बानी हर तरफ़
……
मैं अकेला ही खडा था देश की सरहद पे जब
फोन पर मसरुफ़ था जोशे जवानी हर तरफ़
……
चीख उटठेगी किसी दिन ये रियाया देखना
रंग तअस्सुब के जो देगी राजधानी हर तरफ
…….
ख़्वाबे ग़फ़्लत में पड़ा हूँ एक मुद्दत से मगर
देती है आवाज़ मुझको कामरानी हर तरफ़
……
आप मेहमां किसी के खुश गुमानी छोडिये
आप जा कर रहे हैं मेज़बानी हर तरफ
……..
सालिब चन्दियानवी

Author
Salib Chandiyanvi
मेरा नाम मुहम्मद आरिफ़ ख़ां हैं मैं जिला बुलन्दशहर के ग्राम चन्दियाना का रहने वाला हूं जाॅब के सिलसिले में भटकता हुआ हापुड आ गया और यहीं का होकर रह गया! सही सही याद नहीं पर 18/20की आयु से शायरी... Read more
Recommended Posts
ग़ज़ल- रोती कहानी हर तरफ है
ग़ज़ल- रोती कहानी हर तरफ है ◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆ यहाँ रोती कहानी हर तरफ है बड़ी लगती वीरानी हर तरफ है नया इक आशियाना ढूँढ लेना लगे... Read more
मन
मन शांत रहे कैसे जब देखूं अशांत जन जीवन, मरघट बन चुका यह धरती सुनहरी नहीं कोई दोस्त ने कोई परिजन; नजर दौराऊँ जहां तक... Read more
हर तरफ गहरी नदी है, क्या करें
हर तरफ गहरी नदी है, क्या करें तैरना आता नहीं है, क्या करें ज़िंदगी, हम फिर से जीना चाहते हैं पर सड़क फिर खुद गई... Read more
मुक्तक
कबतलक तेरा इंतजार मैं करूँ? दर्द की नुमाइश हर बार मैं करूँ? खौफ है कायम बेरुखी का तेरी, कबतलक खुद को बेकरार मैं करूँ? मुक्तककार-... Read more