रगं तआस्सुब के जो देगी राजधानी हर तरफ़

खूब है मशहूर ये झूठी कहानी हर तरफ़
चाँद पर देखी गई है एक नानी हर तरफ
…….
सारी दुनिया जानती है क़ीमतें इनकी मगर
क्यों बहाते फिर रहे हैं खून पानी हर तरफ़
…….
आप क़ायम कर नहीं सकते अगर चैनो अम्न
कैसे कर सकते हैं क़ायम हुक्मरानी हर तरफ़
…….
उम्र भर मैं प्यार के दो बोल को तरसा मगर
थी बहुत बिखरी हुई शींरी ज़बानी हर तरफ़
……
मैं अकेला ही खडा था देश की सरहद पे जब
फोन पर मसरुफ़ था जोशे जवानी हर तरफ़
……
चीख उटठेगी किसी दिन ये रियाया देखना
रंग तअस्सुब के जो देगी राजधानी हर तरफ
…….
ख़्वाबे ग़फ़्लत में पड़ा हूँ एक मुद्दत से मगर
देती है आवाज़ मुझको कामरानी हर तरफ़
……
आप मेहमां किसी के खुश गुमानी छोडिये
आप जा कर रहे हैं मेज़बानी हर तरफ
……..
सालिब चन्दियानवी

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