.
Skip to content

रंगोत्सव

Arun Trivedi

Arun Trivedi

गीत

March 14, 2017

रंगोत्सव पर मन के भाव
*******************

प्रेम के ये रंग , भाव प्रेमातुर हृदय के ..
बसे तार तार जो , बिना किसी लय के ……

मन की पिचकारी ,अरे मन ही पै मारी …
अब प्रेम मधु मटकी ,उड़ेल दी है सारी …..

रंग दिया तन मन बिना किसी भय के ….
प्रेम के ये रंग ,भाव प्रेमातुर हृदय के ..

चाहत की कुमकुम , प्रतीक्षित ये भाल ….
सपने मेँ आ आकर, हो मलती गुलाल …

प्रेम वीथि प्रिये कसी. देखो आज कैसे …….
प्रेम के ये रँग भाव , प्रेमातुर हृदय के …
बसे तार तार जो बिना किसी भय के ….

क्रमशः

@अरुण त्रिवेदी अनुपम

अंतस से

Author
Arun Trivedi
Recommended Posts
रंग-रंगोली
हुरियारिन रंग डाले हुरियारे मन भाई होली घुमा-घुमा लट्ठ मार रही, करती हंसी-ठिठोली प्रेम पगे रंग लगे जोश से बजे ढोल मृदंग हृदय के भीतर... Read more
चले पिचकारी प्रेम रंग की
चले पिचकारी प्रेमरंग की समता रूपी उड़े गुलाल । बैर भाव तज होली खेलें तज दें मन के सभी मलाल ।। मन एक बर्तन वाणी... Read more
प्रेम
जीवन अधूरा प्रेम बिना भक्ति अधूरी प्रेम बिना है समर्पण अधुरा ही प्रेम बिना है हर भाव अधुरा प्रेम बिना ज्ञान अधुरा अध्यात्म अधुरा इस... Read more
मन : हाइकु
प्रदीप कुमार दाश "दीपक" मन : हाइकु 01. महका मन हाइकु की सुगंध बाँचे पवन । 02. मन फकीर चित्रोत्पला के तीर रे ! क्यों... Read more