योद्धा का पराक्रम

हुँकार रहा, हुँकार रहा रणबीच धनुर्धर हुँकार रहा,
शत्रुपक्ष से घिरा ब्याल, महि पर जैसे फुफकार रहा।
शत्रु हृदय को विदीर्ण करेगी उसकी शोणित तलवार,
और करेगी रक्तपान, करके उस की ग्रीवा को पार।
हुँकार रहा, हुँकार रहा ………………….
शत्रुपक्ष के इन्द्रजाल को करदेगा वह चकनाचूर,
काँप उठेगी नस-नस अरि की, जब देखेंगी साहस भरपूर।
आज निमज्जन कर लेगा वह शत्रुपक्ष के रक्त से,
दे देगा वह उनको शिक्षा निज पराक्रम के बल से।
हुँकार रहा हुँकार रहा…………………………..
उसके साहस को कम आँकना आज महँगा पड़ जाएगा।
रक्त पिएगा जब वह उनका और काल मँडराएगा।
सोच उठेंगे गलती कर दी, इस वीर पुरुष से भिड़कर,
जाएँ कहाँ अब बुद्धिभ्रम हुआ, काटेगा यह इक-इक कर।
हुँकार रहा हुँकार रहा…………………………..
देखेंगे जब वह उसका साहस, निज साहस को कोसेंगे,
आया इसमें अतुल बल कैसे, खुद से ही वह पूछेंगे।
जब न मिलेगा कोई उत्तर, अपनी जान बचाने को,
कर देंगे वह आत्म समर्पण, उससे यूँ ही बच जाने को।
हुँकार रहा हुँकार रहा…………………………..
##अभिषेक पाराशर##(9411931822)

366 Views
"गुरुकृपा: केवलम्" श्रीगुरु: शरणं मम। श्रीसीताशरणं मम। श्रीराम: शरणं मम। आदर्श वाक्य है- "स्वे स्वे...
You may also like: