योग

करते रहे जो योग
जीवन बने निरोग

परिश्रम करो सदैव
कोई लगे न रोग

सादा हो खान-पान
भागे तमाम रोग

भौतिक सुखों को त्याग
जोगी लिए हैं जोग

तन-मन खिला-खिला तो
बाक़ी बचे न रोग

Like Comment 0
Views 4

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share
Sahityapedia Publishing