गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

योग

करते रहे जो योग
जीवन बने निरोग

परिश्रम करो सदैव
कोई लगे न रोग

सादा हो खान-पान
भागे तमाम रोग

भौतिक सुखों को त्याग
जोगी लिए हैं जोग

तन-मन खिला-खिला तो
बाक़ी बचे न रोग

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