योग

1
सुख सुविधाओं का नहीं ,बनना कभी गुलाम
तन को देकर कष्ट कुछ, नित्य करो व्यायाम
2
योगासन यदि नित करो , दूर रहेंगे मर्ज़
करना लोगों को सजग, हम सबका है फ़र्ज़
3
तन मन दोनों की सदा,बनी रहेगी खैर
रोज सवेरे यदि करो, तेज़ कदम से सैर
4
सांसों का बस खेल है, कहते जिसको योग
करते हैं ये बिन दवा,ठीक यहाँ सब रोग
5
जम कर करती है वसा, दिल का ट्रैफिक जाम
पिघला सकते हैं इसे, करके प्राणायाम
6
करो मानकर साधना, नित्य योगाभ्यास
तन मन चुस्त दुरुस्त हो, बढ़े आत्मविश्वास
7
भोगवाद को छोड़कर, करो रोज ही योग
बीमारी से दूर रह, काया बने निरोग
8
साँसों की गतिशीलता , हैअनुलोम विलोम
हरकर सब अवसाद दे, परम शांति ओम

डॉ अर्चना गुप्ता
मुरादाबाद

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