कविता · Reading time: 1 minute

योग दिवस

चलो चले मिल कर योग करे
काया को अपनी निरोग करे

नित सूर्य नमस्कार करे हम
प्राणायाम और ध्यान धरे हम
चुस्त , दुरूस्त हो प्रति क्षण
सुखद जीवन का भोग करे

चलो चले मिल कर योग करे

जीवन अखिलेश्वर का वरदान
जिस पर सबको हो अभिमान
जीवन तूलिका में सतरंगी भर
सत्कार्यों में इसका उपयोग करे

चलो चले मिल कर योग करे

ऋषि मुनियों की वाणी को मान
संकट के आभास को हम जान
सहारा बन कर निर्धन जन का
तन मन धन से हम सहयोग करे

चलो चले मिल कर योग करे

यम, नियम के व्रत को अपना
खुशहाली का देखो नव सपना
जीवन रक्षा के मिल कर हम
नित नव सार्थक प्रयोग करे

चलो चले मिल कर योग करे

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