ये वक़्त है

कौन यहाँ किसका अपना है
ये वक़्त है जो
कभी दिखाता सपना है
कभी दिखाता आईना है
जो आज राजा बने घूमते है
उन्हें क्या पता
वक़्त का ऊंट किस करवट बैठने वाला है
वक़्त का पूंछ कहाँ कोई पकड़ पाया है
मैं आज अपने अच्छे दिन पर खुशियाँ क्यों मनाऊँ
वक़्त ने क्या मुझे कम रुलाया है

ये वक़्त है जो
जो बांधे रखता है अपनी गिरफ्त में
जो खुल जाए वक़्त की गाँठ एक बार तो
कोई कहाँ बाँध पाया है
ये वक़्त ही है जो
जो कभी काटो तो कटता नहीं
जो कभी बचाओ तो बचता नहीं
जो आज कहते फिरते है
वक़्त हमारा है
उन्हें क्या पता
वक़्त किसी की बपौती नहीं–अभिषेक राजहंस

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