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ये री बिन्नी मेरो वलम बड़ो प्यारो री

ये री बिन्ना मेरे बलम बड़ो प्यारो,
मेरे नयनो को तारो………………
ये री जीजी मेरे नयनो को ता रो.!
री बिन्ना…………………………..
कबहु न पलका को तानत है,
सब बाते वो तो मानत है
झाडू लगबे सारो………….
री जीजी मेरो बलम ………..
बच्चो को भी रोज नहावे,
रोटी सब्जी रोज बनाबे..
काम करत है सारो…..
री विन्ना मेरो बलम……..
बिस्तर पे कपड़ा गाँजत है,
वर्तन भी ढंग से माँजत है
मेरे प्राणो को प्यारो……
री बिन्ना मेरो वलम….

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संप्रति - शिक्षक संचालक -G.v.n.school dungriya लेखन विधा- लेख, मुक्तक, कविता,ग़ज़ल,दोहे, लोकगीत भाषा शैली - हिंदी और बुन्देली भाषा में रचनाएं रस - मुख्य रूप से करुण रस, श्रृंगार रस,…
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