Aug 25, 2016 · कविता

ये रात की सच्चाई है

“ये रात की सच्चाई है
छिपी जिसमे गहराई है”
सन्नाटों मै हो जाते शहर गुम
वही रात मैंने जगाई है
क्यू ना सो गया मै
क्यू ना लेले ये रात मुझे आगोश मै
क्यू ना देख सकु मै भी सपने
कुछ अच्छे कुछ मीठे से
क्यू मुझसे ही तेरी लड़ाई है

“ये रात की सच्चाई है
छिपी जिसमे गहराई है”
यू ही नहीं जाग जाता कोई इस कदर
जो करे शिकवे रातों के सन्नाटों से
होके तर बतर
कुछ बैर तेरा ही होगा
गुमनाम शहरों के किस्सों मै
नाम तेरा ही क्यू होगा
मंजिल तेरी, मुकाम तेरे
राह तेरी , आसमान तेरा
दरिया तेरा , साहिल तेरा
समुन्द्र तेरा , सूखा तेरा
अपने तेरे , पराये तेरे
कर्म तेरे , परिणाम तेरे
मेरा क्या !!
मै तो ले लेता हु सबकुछ
मेरी काली चादर मै
कुछ छुपा नहीं है
इन गवारे बादलों से
“ये रात की सच्चाई है
राही , जिसकी जानी तूने गहराई है
ये रात की सच्चाई है”

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कौशल मीणा जयपुर राजस्थान मै एक कॉलेज स्टूडेंट हु , राजस्थान यूनिवर्सिटी कॉमर्स कॉलेज जयपुर...
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