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ये मोदी तूने हमने दर- दर भगा के मारा

तर्ज – ये मौत तूने हमको
ये मोदी तूने हमने दर- दर भगा के मारा
घर से किए है बेघर _भूखा फिरा के मारा
ये मोदी तूने हमको . . . . . . . . .
दुनियां को दोष क्या दूं तेरे करम है खोटे
तुझपे किया भरोसा तूने ही हमको मारा
ये मोदी तूने हमको . . . . . . . . .
तुझको जीताके हमने दरदर की खाईं ठोकर
फिर भी ओ मोदी तूने डीजल बढ़ा के मारा
ये मोदी तूने हमको . . . . . . . . . .
मेरा चीखता जहांँ है कुछ तो रहम तू करले
जनता का बन मसीहा रावण की चाल मारा
ये मोदी तूने हमको ………..
कृष्णकांत गुर्जर धनोरा
तह. गाडरवारा 7805060303

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संप्रति - शिक्षक संचालक -G.v.n.school dungriya लेखन विधा- लेख, मुक्तक, कविता,ग़ज़ल,दोहे, लोकगीत भाषा शैली - हिंदी और बुन्देली भाषा में रचनाएं रस - मुख्य रूप से करुण रस, श्रृंगार रस,…
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