गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

ये मालुम है बहुत मुश्किल है जीना और सफ़र का…

ये मालुम है बहुत मुश्किल है जीना
और सफ़र का पैग़ाम लिया करते हैं

दूरी बढ़ जाती है हर क़दम
फ़िर भी चलने का गुमान लिया करते हैं

कुछ तो कशिश हो एक दम में जीने की
यूँ ही साँसों से उधार लिया करते हैं

नब्ज़ भी ठहरी नहीं,ना रूकी कहीं
ऐसी ही बिमारी सरेआम लिया करते हैं

अब जाके करार आया दिल को
जो झाँका, अंदर तूफान लिया करते हैं

यूँ ही एकपल कट जाती है ज़िंदगी
जब जिया दिल से, एक मकाम लिया करते हैं

अब क्यों करें अब्र से सिफ़ारिश
हम अपने ज़मीं को गुलज़ार किया करते हैं

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