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ये माना घिरी हर तरफ तीरगी है

Dr Archana Gupta

Dr Archana Gupta

गज़ल/गीतिका

November 18, 2017

ये माना घिरी हर तरफ तीरगी है
मगर छन भी आती कहीं रोशनी है

न करती लबों से वो शिकवा शिकायत
मगर बात नज़रों से सब बोलती है

रहे दिल मे तूफान ,आंखों में सागर
न जाने हवा कैसी चलने चली है

गमों के जो बादल खुशी बन के बरसे
लगा ज़िन्दगी मिल गई दूसरी है

भटकता हुआ देख मासूम बचपन
भरा दर्द दिल में नयन में नमी है

मुहब्बत बिना व्यर्थ है सारा जीवन
हमेशा जमाने को पर ये खली है

इरादे बुलन्दी पे हैं आज इसके
भले नाज़ नखरों में बेटी पली है

निगलने लगा धूप को अब धुआँ ये
जलन से झुलस सी गई चाँदनी है

तुम्हें पा लिया जो, न अब चाहिए कुछ
तुम्हारी खुशी हर हमारी खुशी है

हमें ‘अर्चना’ लोग कहतें हैं पागल
जो आवाज बस दिल की हमने सुनी है

डॉ अर्चना गुप्ता
17-11-2017

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Author
Dr Archana Gupta
Co-Founder and President, Sahityapedia.com जन्मतिथि- 15 जून शिक्षा- एम एस सी (भौतिक शास्त्र), एम एड (गोल्ड मेडलिस्ट), पी एचडी संप्रति- प्रकाशित कृतियाँ- साझा संकलन गीतिकालोक, अधूरा मुक्तक(काव्य संकलन), विहग प्रीति के (साझा मुक्तक संग्रह), काव्योदय (ग़ज़ल संग्रह)प्रथम एवं द्वितीय प्रमुख... Read more

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