गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

ये बेफिजुल का सुनना सुनाना नही होगा

ये बेफिजुल का सुनना सुनाना नही होगा
तय हुआ है अब रोज का मिलना मिलाना नही होगा

दूर रहने से क्या जान पहचान बदल जाएगी
होगा तो ये होगा के आना जाना नही होगा

दरिया खुद ही समंदर तलाश लेतीं हैं
मोहब्बत में अब किसी से पुछना पुछाना नही होगा

आ एक दिन तसल्ली से बैढकर गुफ्तगुं कर लेते हैं
मुझसे ये रोज का वाट्सअप पर मैसेज पढ़ना पढ़ाना नही होगा

जिस बला कि खुबसुरत लगना हो एक बार में ही लग जा
तेरी खुबसुरती में तनहा यू बार बार ग़ज़लें लिखना लिखाना नही होगा

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