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ये दीपावली ऐसी सोच वाली.....

दीपावली आ गई है और हर साल की तरह इस वर्ष भी लोग इस बहस मे लगे हुए है कि पटाखे नही छोड़ो कोई कह रहा है कि क्यों नही छोड़ो
लेकिन कुछ भी हो किंतु दिल्ली मे तो फरमान यही है कि भइया पटाखे जलाए लेकिन 8 से 10 सही भी है क्योंकि साल मे एक बार ही इस खास उत्सव का जश्न मनाने का मौका मिलता है तो क्यों न छुड़ाए पटाखे लेकिन यँहा पर ये भी ध्यान देना जरुरी है कि पटाखे सिर्फ एक रात छुड़ाए जाते हैं लेकिन हम लोग जो रोज वातावरण को प्रदूषित करते हैं उस विषय मे क्यों नही बात करते प्रदुषण के कारण भी तो हम लोग हैं जो कहीं भी कूड़ा करकट फैलाते हैं खुले मे कूड़ा जलाते है और फिर जो सबसे वहत्वपूर्ण बात है वो ये कि भइया वाहनों से होने वाले प्रदुषण के बारे मे कौन सोचेगा एक घर मे ही कई कई वाहन है परिवार के लोगों को एक ही दिशा मे जाना है किंतु नही अपने अपने वाहन से जाएगें तो दादा इससे पॉल्युशन नही होता क्या तो भई शहर हमारा है देश हमारा है तो हमे ही सोचना पड़ेगा ना हम कुछ नही कर सकते तो जो गलत कर रहे हैं हम कम से कम वो तो न करे……….. …
भइया मै खुद खिलाफ हूँ पटाखे के मेरे निजी विचार है पटाखा जलाना मतलब पैसे मे आग लगाना लेकिन त्यौहार है तो इंजॉय कर सकते है साल मे एक दिन पटाखे जलाने से प्रदुषण नही हो रहा लेकिन सावधानी से क्योंकि हर साल दीपावली पर पटाखों से होने वाली दुर्घटना की खबर आती है वो कितनी अशुभ होती है हम शुभ दीपावली कहते हैं तो अगले दिन अशुभ समाचार क्यों इसलिए पटाखे जलाए त्यौहार बनाए लेकिन सावधानी से साथ ही साल भर जो प्रदुषण हम फैलाते हैं उस पर विचार करें दीपावली अच्छी सोच खुशीयों और साफ सफाई का त्यौहार है इसलिए साफ सफाई रखें अच्छा सोचे और खुशीयाँ बनाए…. देश हमारा है शहर हमारा है……
सबको दीपावली के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं सबके लिए यह दीपावली शुभ रहे और जीवन मे रोशनी लाए…….
#ये_दीपावली_ऐसी_सोच_वाली…….
#निखिल_कुमार_अंजान…….

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निखिल कुमार अंजान
निखिल कुमार अंजान
दिल्ली
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शब्दों से प्यार करता हूँ लिखने का शौक रखता हूँ...