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** ये दिल हुआ ना कभी अपना **

भूरचन्द जयपाल

भूरचन्द जयपाल

गज़ल/गीतिका

March 7, 2017

ये दिल हुआ ना कभी अपना
हुआ पराया होकर भी अपना
खायी ज़ालिम जमाने की ठोकर
दर-दर डर-डर आपा खो कर
ये दिल की लगी है नही दिल्लगी
मंजर इश्क-ए-तूफां कब रुकेगा
निगाहों से आकर दिल में बसी
फिर भी आँखों में नमी सी है
ना जाने दिल में कमी सी है
ख्यालों में अब क्यूं बसी सी है
ये दिल हुआ ना कभी पराया
हुआ पराया होकर भी अपना।।
दर्द हुआ ऐसा सीने में जैसे ख़ंजर
दिल चीर के देख ले मेरा -अपना
ये दिल हुआ ना कभी अपना
हुआ पराया होकर भी अपना ।।

?मधुप बैरागी

Author
भूरचन्द जयपाल
मैं भूरचन्द जयपाल स्वैच्छिक सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि... Read more
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