Jul 21, 2016 · मुक्तक
Reading time: 1 minute

ये जीवन भी क्या हैं?

ये जीवन भी क्या हैं, कभी उत्थान तो कभी पतन,
कभी गूँज भरी किलकारियाँ, कभी मौत का निमंत्रण
कही लुटता हुआ धन हैं, कही घुटता हुआ मन,
कही हंसने पर पैसा हैं, कही रोना आजीवन !

– नीरज चौहान

5 Comments · 98 Views
Copy link to share
Neeraj Chauhan
65 Posts · 20.5k Views
Follow 10 Followers
कॉर्पोरेट और हिंदी की जगज़ाहिर लड़ाई में एक छुपा हुआ लेखक हूँ। माँ हिंदी के... View full profile
You may also like: