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*ये जीवन बड़ा अनमोल है*

अनुजा कौशिक

अनुजा कौशिक

कविता

August 24, 2017

हे मानव !

ये जीवन बड़ा अनमोल है
चिन्ता कैसी करे है पगले
ये दुनियां बड़ी गोलमोल है

ज़िन्दगी है ये अनिश्चित
तू क्यों कर रहा है खुद को भ्रमित
जीवन आगे बढ़ने का नाम है
ना समझ कि तू बन्दा कोई आम है

ये जीवन बड़ा अनमोल है….

तू रो..हँस..गा कुछ भी कर
बस जीवन को यूं बर्बाद ना कर
तू आगे बढ़..बस हिम्मत न हार
तेरा कुछ न बिगाड़ पायेगी समय की अब ये मार

ये जीवन बड़ा अनमोल है….

नहीं अकेला है तू इस जग में
जोश भरा है तेरे रग रग में
माना कांटे हैं पग पग में
पर मत भूल
कर ले अब ये बात कबूल
ऊपर बैठा वो पालनहार है
योजना नहीं होती कोई उसकी बेकार है

ये जीवन बड़ा अनमोल है…..

ज़रूर कोई तो मकसद होगा
जो तुझे इस धरती पर भेजा होगा
तू ज़िन्दगी के संग बस मुस्कुराता ही चल
ना रुक राही अब बस चले चला चल

ये जीवन बड़ा अनमोल है….

तू नहीं प्राणी कमज़ोर है
पर किस्मत पर चला न कभी किसी का ज़ोर है
मन में चलता कभी गर चिन्ताओं का शोर है
जब लगे दुखों की छायी घटा घनघोर है
तब तू ही अपना साथी और तू ही अपना चिन्ता चोर है
अब भी तेरे मन में कैसा मचा ये शोर है

ये जीवन बड़ा अनमोल है
चिन्ता कैसी करे है पगले
ये दुनियां बड़ी गोलमोल है

©® अनुजा कौशिक

Author
अनुजा कौशिक
मैं एक प्रोफ़ेश्नल सोशल वर्कर हूं..ज़िन्दगी में होने वाले अनुभवों और अपने विचारों की अभिव्यक्ति अपने लेखों और कविताओं के माध्यम से कर लेती हूं..
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