ये गन्दी राजनीति

ये झूटे वादे रहने दो,
ये झूटी वर्दी रहने दो,,
हम आंसू पीकर भी चैन से जीते,
तुम अपनी हमदर्दी रहने दो,,
बड़ी फैलाई नफरत तुमने,
जात-धर्म के नाम पर,
अब ऐसा करो साहब मुझको तुम,
छोड़ो मेरे हाल पर,,
झाककर देख खुद मे ज़रा,
तेरा ज़मीर तो मुर्दा,,
भारत माता भी तुझपर,
कितना ज़्यादा शर्मिंदा है,,
अब न करो ऐसी सियासत,
जात-धर्म के नाम पर,
अब ऐसा साहब मुझको तुम,
छोड़ो मेरे हाल पर,,
जात-धर्म के नाम पर,
कैसी हमदर्दी दिखलाई है,,
हर जगह पहुँच कर तुमने तो,
बस नफरत ही फैलाई है,,
हम एक साथ रह न सके,
कैसी हमसे ये तिजारत है,
नफरत मे डूबा है मुल्क मेरा,
अल्लाह ये कैसी सियासत है,
बहुत हुई अब तेरी हमदर्दी,
जात-धर्म के नाम पर,
अब ऐसा करो साहब मुझको तुम,
छोड़ो मेरे हाल पर,,,

((((ज़ैद बलियावी)))

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तुम्हारी यादो की एक डायरी लिखी है मैंने...! जिसके हर पन्ने पर शायरी लिखी है...
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