कविता · Reading time: 1 minute

“ये कोरोना हार जाएगा”

दबे पांव गुजर जाएगा,
ये कोरोना हार जाएगा।
सुनो रस होते है नौ,
ये दसवां रस है वाय,
आया कहां से भाय,
कल हाथ मसलता ,
यूं ही रह जाएगा,
ये कोरोना हार जाएगा।
फिर चलेंगे मौज करने,
गोलगप्पे और हाट करने,
नौनिहाल भी खेलेंगे,
मस्ती में झूमेंगे,
ये वायरस भी रोएगा,
दिन हमारा जब आएगा,
ये कोरोना हार जाएगा।
सारे रस जीवन के भूले,
बस एक वायरस में ही डोले,
फिर नौ रस आएगा ,
जीवन झूम झूम जाएगा,
ये कोरोना हार जाएगा…
ये कोरोना हार जाएगा…
© डा० निधि श्रीवास्तव “सरोद”

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