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ये कैसा हादसा हुआ है

Bhupendra Rawat

Bhupendra Rawat

गज़ल/गीतिका

September 3, 2017

ये कैसा हादसा हुआ है
अब कैसा रगडा हुआ है

जोड़ने की चाह थी दिल को
ये तो टूट कर बिखरा हुआ है

ठोकरों से बाहर निकल कर
दिल फिर से निखरा हुआ है

मरहम की जुस्तजूं में
कल्ब फिर घायल हुआ है

रुसवा है तू आज फिर से
देख मौसम भी बिगड़ा हुआ है

कासिद दरिया-ऐ-इश्क में डूबा हुआ है
जा-बा-जा बज्मे-गमज़दा सजा हुआ है
कासिद==डाकिया
दरिया-ऐ-इश्क= प्यार का दरिया
जा-बा-जा= जगह – जगह
बज्मे-गमज़दा= ग़मों में डुबो हो की महफ़िल

वस्ले-यार की आस में शामो-शहर
हिज्र में रिंद बन गमज़दा हुआ है
वस्ले-यार=महबूब से मिलन
रिंद=शराबी
हिज्र=जुदाई
गमज़दा=गम में डूबा हुआ

बज़्म में वफाई की बे-वफ़ा ने
खते-तर्क-वफ़ा का इनाम में भेजा हुआ है
खते-तर्क-वफ़ा = प्यार खत्म करने का खत
पयाम=सन्देश
भूपेंद्र रावत
3/09/2017

Author
Bhupendra Rawat
M.a, B.ed शौकीन- लिखना, पढ़ना हर्फ़ों से खेलने की आदत हो गयी है पन्नो को जज़बातों की स्याही से रँगने की अब बगावत हो गईं है ।
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