.
Skip to content

*ये आँखें तेरी कत्लखाने से कम नहीं*

भूरचन्द जयपाल

भूरचन्द जयपाल

शेर

August 18, 2017

18.8.17 **** प्रातः **** 7.58

ये आँखे तेरी किसी कत्लखाने से कम नहीं है

अगर मर जायें तुझपे तो अब हमें ग़म नहीं है ।।

?मधुप बैरागी

अब मयखाने जाकर मय पीने की तलब किसको है

तेरी आँखों के पयमाने मय- तहख़ाने से क्या कम है ।।

?मधुप बैरागी

Author
भूरचन्द जयपाल
मैं भूरचन्द जयपाल स्वैच्छिक सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि... Read more
Recommended Posts
तेरी आँखों के इशारे
29.12.16 ***** प्रातः 10.45 आज एक छोटा सा प्रयास ग़ज़ल ******* प्रारम्भिक बोल *********** जानेमन तेरी आँखों के इशारे ही बहुत है हमें अब मय... Read more
*** तेरी गली में हम***
आये है घर छोड़ के अपना साजन तेरी गली में हम मिले चाहे ख़ुशी या ग़म अपना घर छोड़ आये हम मिलना अब हम तुम... Read more
** नहीं कम किसी से हम **
ऐ चाँद तुझको फलक से ज़मी पर उतार लाएंगे हम मत दिखा तूं अपनी जादूगरी नहीं कम किसी से हम तुझको बना के छोड़ेंगे दिल... Read more
*** दीवाने हो गये हैं हम  ****
दीवाने हो गये हैं हम दीवाने हो गये हैं हम नहीं हैं हम किसी से कम जहां में दौलते हैं कम नहीं हैं अब किसी... Read more