बाल कविता · Reading time: 1 minute

इतवार यूं मनाएं

ऐसे इतवार मनाएं हम
पापा का हाथ बटाएं हम

एक अकेले पर कितना काम
उन्हें नहीं मिलता है आराम

भाग- दौड़ में थक जाते हैं
ऑफिस में वो पक जाते हैं

गर्मी, सर्दी या हो बरसात
सहन करें सब मुश्किल हालात

रोजाना कुछ लेकर आते
हम पर ढेरों प्यार लुटाते

निभाते अपने सारे फ़र्ज़
सभी पर उनके ढेरों क़र्ज़

© अरशद रसूल

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