Feb 28, 2017 · कविता
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यूँ ना रूठो मुझ से…

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यूँ ना रूठो मुझ से
मेरी प्रीत है
सिर्फ तुझ से……

यकीन नहीं तो
पुछ लो तुम
अपने ही दिल से…

यूँ ना छुड़ाओ
हाथ तुम
मेरे हाथों से….

तेरे बिना
हो जाऐगें हम
आधे-अधुरे से…..

जीवन की
ये डोरी
बँधी तुम से….

प्यार हुआ
तेरी निर्मल
मन से…….
????—लक्ष्मी सिंह

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लक्ष्मी सिंह
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MA B Ed (sanskrit) My published book is 'ehsason ka samundar' from 24by7 and is... View full profile
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