यौवन अतिशय ज्ञान-तेजमय हो, ऐसा विज्ञान चाहिए

यौवन अतिशय ज्ञान-तेजमय हो ऐसा विज्ञान चाहिए
जो सोए है उने जगाने का संकल्प महान चाहिए
क्षिति नायक तेरे दुखिया मन में प्रकटे जैसे प्रसन्नता
अब मुझको ऐसे विचार मंथन का रण अविराम चाहिए

हे आभा के पुंज ,नींद को त्यागो शुचि निर्मल वितान हो
उर- अंदर देवत्व छिपा है, इसे जगाओ ब्रम्हज्ञान हो
आत्मा ही अव्यक्त ब्रह्म है इसे व्यक्त कर लक्ष्य पाइए
कुंडलिनी के चक्र जगाने वाला योग-विधान चाहिए
यौवन अतिशय ज्ञान-तेजमय हो ऐसा विज्ञान चाहिए

सभी प्राणियों में ईश्वरमय आत्मतत्व का शुभ दर्शन हो
मानव,मानव के समीप हो सत्य- प्रेम का संवर्धन हो
निर्बलता को त्याग बढो- जागो तुम शंखनाद कर डालो
जीवित शव में प्राण फूक दे, ऐसा अनुसंधान चाहिए
यौवन अतिशय ज्ञान- तेजमय हों ऐसा विज्ञान चाहिए

मलिन रहे न कोई, हर एक ब्रह्मणत्व के दर्शन कर ले
जो निज को पहचान जगे वह , दिव्य ज्ञान-संवर्धन कर ले
मेंढक बनकर पड़े, कुए को समझ रहे संपूर्ण विश्व हम
बाहर लाकर इने जगा दे ,ऐसे मनुज महान चाहिए
यौवन अतिशय ज्ञान-तेजमय हों, ऐसा विज्ञान चाहिए
जो सोए हैं उने ,जगाने का संकल्प महान चाहिए

बृजेश कुमार नायक
“जागा हिंदुस्तान चाहिए” एवं “क्रौंच सुऋषि आलोक” कृतियों के प्रणेता

“जागा हिंदुस्तान चाहिए” कृति की रचना(परिष्कृत रचना)
पृष्ठ संख्या 22
“जागा हिंदुस्तान चाहिए”कृति प्रकाशित होने का वर्ष -2013
प्रकाशक-जे एम डी पब्लिकेशन नई दिल्ली
रचनाकार -बृजेश कुमार नायक, सुभाष नगर, कोंच

रचना का आकाशवाणी से काव्य पाठ प्रसारित हो चुका है
05-05-2017

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