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युद्ध गीत

May 2, 2017

गीदड़ भभकी कब तक देंगे ।
अब तो शीश धरा पे बिछायेगे ।।

पौरूष अब दिखाना होगा ।
रक्त रगों में खोलाना होगा ।।

कायर को अवसर देने से ।
कायरता ही दिखलायगा ।।

सिर के ढेर लगे सीमा पर ।
दुश्मन रक्त रंजित हो जायेगा ।।

तब ही टीस मिटे हृदय की ।
कटे सिरों पर कब तक नीर बहायेगे।।

प्रीत लगाकर छुरा भोगना ।
दुश्मन की फितरत है पुरानी ।।

सर्जिकल से अब नहीं बनेगी बात ।
खत्म करनी होगी अब तो कहानी ।।

अविरल बहते नीर नयन से ।
बिधवाओ की कौन सुनेगा पीर ।।

निर्दोषो की मौत का मातम ।
कब तक यूँ ही मानायेगे ।।

समसीरो की जंग छुड़ाकर ।
ध्वजा विजय की हाथ में लेकर ।।

दुश्मन के सीने पर चड़कर ।
हिसाब बराबर करने होंगे ।।

कोटि कोटि हृदयो की पीड़ा ।
शीश धरा पर बिछाने होंगे ।।

गर पड़ जाये बलिदानी कम तो।
बच्चे बच्चे सैनिक बन जायेंगे ।।

कुछ तो कदम बड़ाने होंगे ।
कठिन फ़ैसले करने होंगे ।।

रहता जिंदा वही देश है ।
युद्ध से जो न डरता हो ।।

अगर मगर की बातें छोड़ें ।
युद्ध गीत अब हम गायेंगे ।।

उमेश मेहरा
गाडरवारा (मध्य प्रदेश)
9479611151

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umesh mehra
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